16 अक्टूबर से जारी रोडवेज हड़ताल आखिरकार शनिवार को खत्म हो गई। 18 दिन बाद रोडवेज के सभी कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। हालांकि अभी यातायात पूरी तरह से सुचारू नहीं हुआ है क्योंकि कुछ रूट पर अभी भी अनुबंध पर लगे हुए ड्राइवर-कंडक्टर बसें लेकर गए हुए हैं। जैसे-जैसे बसें डिपो में आ रही हैं, स्थायी ड्राइवर-कंडक्टर उन्हें रूट पर लेकर निकल रहे हैं। वहीं सरकार ने अनुबंध पर लगाए गए ड्राइवर-कंडक्टर को रिलीव करने के आदेश दिए हैं।
करनाल डिपो के बाहर अनुबंधित ड्राइवरों ने किया प्रदर्शन
- रिलीव किए गए ड्राइवर-कंडक्टर इस बात का विरोध कर रहे हैं। करनाल में उन्होंने रोडवेज बस अड्डे के बाहर सरकार और रोडवेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना था कि सरकार ने उनके साथ अन्याय किया है, उन्होंने अपनी पुरानी नौकरियां भी छोड़ दी और अब सरकार ने कुछ दिन काम करवाकर उन्हें रिलीव कर दिया।
- बता दें कि 02 नवंबर को हड़ताल के 18वें दिन हाईकोर्ट में हुई तीन दौर की सुनवाई के बाद कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने कोर्ट को दिन के 3:15 बजे लिखकर दिया कि सभी कर्मचारी शनिवार को दस बजे काम पर लौट आएंगे। लेकिन यूनियन नेता रोहतक में रात तक रणनीति बनाते रहे और 10 बजे हड़ताल समाप्ति की घोषणा की। यूनियन के नेताओं को राजी करने के लिए कोर्ट को समझाना पड़ा कि चांद मांगने से मिल नहीं जाता और गिरा हुआ दूध वापस नहीं आता।
- इससे पूर्व चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिए कि कर्मचारियों पर सख्ती न दिखाएं। कोई गिरफ्तारी न हो, जो कर्मी एस्मा के तहत सस्पेंड और बर्खास्त हैं, उन्हें ड्यूटी पर रखा जाए। केस की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।
-
रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी की रोहतक में मीटिंग में 4 नवंबर की जींद रैली टाल दी गई। कमेटी के प्रधान वीरेंद्र धनखड़ व सदस्य सरबत पूनिया ने बताया कि हम काम पर लौट रहे हैं। 12 नवंबर को एसीएस के साथ मीटिंग है और 14 को कोर्ट में फिर सुनवाई है। इसके बाद कमेटी दोनों निर्णयों को लेकर समीक्षा करेगी। अब सरकार कोर्ट के निर्णय को लागू करे।
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.