देश के सवा करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी पिछले कई महीनों से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लागू न्यूनतम वेतनमान में संशोधन की मांग कर रहे हैं. सरकारी कर्मचारियों का आरोप है कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू करने में भेदभाव किया है. इससे अधिकारी वर्ग को फायदा ज्यादा है. बता दें कि मोदी सरकार ने 01 जनवरी 2016 को 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया था. केंद्र सरकार के द्वारा तय फिटमेंट फैक्टर 2.57 और 17 था. जिससे कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 18000 और अधिकारी वर्ग की न्यूनतम सैलरी 2,25,000 तय की गई थी.
केंद्रीय कर्मचारी इसमें संशोधन की मांग काफी लंबे समय से कर रहे हैं. अपनी मांगों को लेकर जून 2018 में कई केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था. लेकिन अब 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव और कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार कर्मचारियों के सामने झुकती दिख रही है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार 26 जनवरी 2019 के मौके पर कर्मचारियों की मांगों पर मुहर लगा सकती है.
बता दें कि केंद्रीय कर्मचारी फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.68 करने की मांग कर रहे हैं जिससे उनकी न्यूनतम सैलरी 18000 से बढ़कर 26000 हो जाएगी. अब देखना है कि केंद्र सरकार न्यूनतम वेतन में कितनी बढ़ोत्तरी करती है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार मौजूदा न्यूनतम सैलरी और कर्मचारियों की मांगों के बीच का रास्ता निकाल चुकी है. बस इसका ऐलान होना बाकी है.
Source - Inkhabar
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