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02 November 2018

कैसे कैलकुलेट होती है ग्रेच्युटी: 5 बड़ी बातें जो हर नौकरीपेशा को जाननी चाहिए

 अगर आप नौकरीपेशा हैं तो जाहिर तौर पर आपने ग्रेच्युटी शब्द को सुना होगा, जो कि अलग अलग ऑफिसेज में अलग अलग वर्षों बाद मिलती है। हालांकि इससे जुड़े नियमों के बारे में अधिकांश कर्मचारी अनजान रहते हैं, जैसे कि यह कब मिलती है और कैसे कैलकुलेट होती है। ग्रेच्युटी आमतौर पर एक तरह का रिटायरमेंट बेनिफिट होता है जो कि आपकी ओर से दी गई सेवा के वर्षों पर निर्भर करता है। यह किसी कर्मचारी की ओर से कंपनी को दी जाने वाली सेवाओं के एवज में उसे दिया जाने वाला एक आवश्यक भुगतान है। सामान्य तौर पर ग्रेच्युटी 5 वर्ष या फिर इससे ऊपर के वर्षों तक ऑफिस को अपनी सेवा देने के लिए मिलता है। वहीं आपको मिलने वाली 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी राशि टैक्स छूट के दायरे में आती है। जानिए इससे जुड़ी पांच अहम बातें।

ग्रेच्युटी पाने का कौन है हकदार?

पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 (ग्रेच्युटी एक्ट) के सेक्शन 3 के मुताबिक फैक्ट्री, माइन्स, ऑयलफील्ड्स, प्लांट्स, पोर्ट्स, रेलवे कंपनियांष शॉप एवं अन्य संस्थानों में 10 वर्ष एवं इससे ऊपर की सेवा देने वाला कर्मचारी ग्रेच्युटी पाने का हकदार होता है। कंपनियों को इस तरह के कर्मचारियों को ग्रेच्युटी नियमों के तहत इसका भुगतान करना ही होता है।

कब नियोक्ता कर्मचारी को ग्रेच्युटी देने के लिए उत्तरदायी होता है?

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अगर कर्मचारी के सेवा वर्षों की अवधि 5 वर्ष होने से पहले ही उसकी मृत्यु, किसी बीमारी के कारण अक्षमता या वह सड़क दुर्घटना का शिकार हो जाता है तो उस सूरत में भी उसे ग्रेच्युटी मिलेगी। सेवानिवृत्ति, इस्तीफा देने एवं स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की सूरत में भी नियोक्ता कर्मचारी को ग्रेच्युटी देने के लिए उत्तरदायी होता है। ग्रेच्युटी भुगतान कानून (1972) उन संस्थानों पर लागू होता है, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं। इसका मुख्य मकसद कर्मचारियों को सेवानिवृति के बाद आर्थिक सुरक्षा देना है।

नियोक्ता की ओर से कर्मचारी को कितने दिनों के भीतर ग्रेच्युटी राशि देनी होती है?

जिस दिन कर्मचारी ग्रेच्युटी निकालने के लिए आवेदन करता है उस तारीख से 30 दिन के अन्दर उसे भुगतान मिल जाना चाहिए। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है तो उसे ग्रेच्युटी राशि पर साधारण ब्याज की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा। अगर यदि कंपनी ऐसा नहीं करती है तो उसे ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम,1972 (Payment of Gratuity Act,1972) के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा जिसमे उसे 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा हो सकती है।

ग्रेच्युटी के संबंध में कर छूट का दावा कितनी बार किया जा सकता है?

इनकम टैक्स अधिनियम 1961 के अंतर्गत ग्रेच्युटी के संबंध में कर छूट का दावा करने की संख्या के संबंध में कोई सीमा नहीं है लेकिन इसकी राशि 20 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

जान लीजिए कैसे कैलकुलेट होती है ग्रेच्युटी?

इसका एक तय फॉर्म्यूला होता है। क्या है ग्रेच्युटी निकालने का फार्म्यूला?

  • लास्ट ड्रॉन सैलरी (बेसिक सैलरी प्लस डिअरनेस अलाउंस) X आपने जितने साल नौकरी की हो X 15/26।
  • इस फॉर्म्यूले के मुताबिक 6 महीने से ऊपर के समय को 1 वर्ष के बराबर मान लिया जाता है। यानी आपने अगर बतौर सेवा 5 साल 8 महीने पूरे कर लिए हैं तो आपकी कुल सर्विस 6 साल की मान ली जाएगी।
  • वहीं अगर आपकी सर्विस 5 साल 5 महीने की है तो आपका सेवा काल 5 साल का ही माना जाएगा।
  • सैलरी= बेसिक + डियरनेस अलाउंस
  • 15 X आपकी आखिरी मासिक सैलरी X काम करने की अवधि/ 26= ग्रेच्युटी

यहां पिछली सैलरी का मतलब बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता और बिक्री पर मिलने वाला कमीशन होता है। मान लीजिए आपका वेतन 50,000 रुपये महीना है और आपने किसी कंपनी में 15 साल 8 महीने काम किया। ऐसे में आपकी ग्रेच्युटी होगी: (15 X 50,000 X 16)/26 = 4.61 लाख रुपये। यहां पर 15 साल 8 महीने को 16 वर्ष की अवधि मान लिया गया है।

Source - Jagran

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