जिन लोगों ने छह साल पहले 30 लाख रुपये से अधिक की जमीन खरीदी और बेची है। बचत खाते में 10 लाख रुपये से अधिक जमा किए हैं। अब वह आयकर की जांच के दायरे में होंगे। अकेले पानीपत में ऐसे 1500 से अधिक लोग हैं। इनमें ग्रामीण भी बड़ी संख्या में हैं। इनमें से ज्यादातर के पास हिसाब-किताब नहीं है। जो जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
31 मार्च 2018 को आयकर विभाग ने सेक्शन 148 के तहत 1500 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए थे। आयकर कानून के मुताबिक छह साल तक के खाते की ही जांच हो सकती है। इसीलिए विभागीय अधिकारी साल के अंत में नोटिस जारी करते हैं। आयकर विभाग ऑनलाइन नोटिस जारी करता है। स्थानीय आयकर विभाग की शाखा मैन्यूअल भी नोटिस सर्व करती है। यह है प्रक्रिया 30 लाख रुपये से अधिक की जमीन की खरीद बेच होने पर सब-रजिस्ट्रार आयकर विभाग को ऑनलाइन जानकारी देता है। बैंक बचत खाते में यदि 10 लाख या उससे अधिक जमा होते हैं तो उसको भी सेक्शन 148 के तहत नोटिस भेज नकदी के स्रोत की जानकारी मांगता है। आयकर विभाग को जानकारी नहीं दी जाती तो विभाग एकतरफा फैसला कर जुर्माने सहित टैक्स लगा देता है। आयकर विभाग की दो विंग है। एक विंग इन्वेस्टीगेशन करती है जबकि दूसरी शाखा एसेसमेंट करती है। इन्वेस्टीगेशन विंग ने 1500 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। एसेसमेंट विंग इनसे जवाब मांग रही है।
एक्सपर्ट व्यू : जवाब जरूर दें अन्यथा होगा भारी नुकसान वरिष्ठ सीए संजय जैन का कहना है कि 148 के तहत जिन लोगों को नोटिस मिले हैं वे उसका जवाब जरूर दें। जे फार्म अथवा जमीन फर्द लाएं। यदि नोटिस का जवाब नहीं दिया जाता है। तो उनके बैंक खाते अटैच कर दिए जाएंगे। आयकर विभाग एकतरफा फैसला देते हुए जुर्माना टैक्स लगाकर रिकवरी के लिए बैंक खाते अटैच करता है। 31 दिसंबर फैसले की अंतिम तिथि नोटिस का जवाब देने के लिए 31 दिसंबर 2018 अंतिम तिथि है। 31 दिसंबर तक यदि जवाब दाखिल नहीं किया गया तो एकतरफा फैसला विभागीय अधिकारी करेंगे।
ऑनलाइन काम नोटिस देने का काम ऑनलाइन हो रहा है। जिन लोगों को नोटिस मिला हो उन्हें विभाग का सहयोग करते हुए जवाब देना चाहिए। 31 दिसंबर इसके लिए अंतिम तिथि है। उसके बाद जवाब न देने वालों के खिलाफ आयकर नियमानुसार कार्रवाई होगी। -अनीता मीणा, संयुक्त आयुक्त, आयकर विभाग, पानीपत।
Source - Jagran
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.