अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि हिमाचल के करीब पौने तीन लाख कर्मचारियों को केंद्र की तर्ज पर संशोधित वेतनमान जारी करने की घोषणा की जाए। राज्य के कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों लागू की जाएं। प्रदेश वेतनमान के लिए पंजाब से जुड़ा हुआ है। वहां वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने में काफी देर लग सकती है। इसका खामियाजा हिमाचल के कर्मियों को भी भुगतना पड़ रहा है।
महासंघ के संयोजक विनोद कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पूर्ण राज्य है। इसका अपना सिद्धांत, नीति और स्वरूप है। इसलिए आज के परिप्रेक्ष्य में किसी एक राज्य को नीतिगत फैसलों में दूसरे राज्य पर निर्भर नहीं रखा जा सकता है। इस संबंध में एक राष्ट्रीय नीति या फिर राज्य की अपनी नीति, ¨सद्धात का निर्माण और क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। उत्तराखंड, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान हमारे प्रमुख पड़ोसी राज्य हैं। वेतन आयोग के मामले में पंजाब पद्धति का इंतजार करना प्रदेश के कर्मचारियों को मंजूर नहीं है। इसमें अनावश्यक विलंब होने के कारण समय पर संशोधित वेतनमान के लाभ नहीं मिल रहे हैं। इससे राज्य सरकार पर आर्थिक बोझ पहले से ज्यादा बढ़ रहा है। हालांकि प्रदेश सरकार एरियर के हिस्से का एक भाग अंतरिम राहत के तौर पर पहले ही दे चुका है। संयोजक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वह इस मामले मे पहल करें। 2016 से देय है संशोधित वेतनमान
कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान 2016 के जनवरी से देय है। केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को यह लाभ दे चुकी है। हर दस साल के बाद वेतन आयोग गठित होता है। पहले केंद्र और फिर राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान जारी करती हैं।
Source - Jagran
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