गुरुवार को चुनाव से पहले आखिरी कैबिनेट बैठक हुई. इस बैठक में केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए कोई बड़ा फैसला नहीं है. ये सरकारी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर नहीं है क्योंकि सातवें वेतन आयोग के तहत सरकारी कर्मचारी वेतन बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे. सरकारी कर्मचारी जिस अच्छी खबर की प्रतीक्षा कर रहे थे यानी मूल न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की कोई और घोषणा नहीं की जाएगी क्योंकि सरकार के लिए अब लोकसभा चुनाव से पहले कोई अन्य मंच उपलब्ध नहीं होगा.
आखिरी कैबिनेट बैठक होने के बाद ही भारतीय चुनाव आयोग चुनाव तारीखों की घोषणा करेगा जिसके बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी. इसके बाद अब सरकार किसी तरह की कोई घोषणा नहीं कर पाएगी. केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को अब हालिया घोषणाओं से संतोष करना होगा जो महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में वृद्धि से संबंधित थी. इसी तरह की घोषणाएं जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, उत्तराखंड और राजस्थान की सरकारों द्वारा की गई थीं. केंद्रीय सरकारी कर्मचारी इस बात से परेशान होंगे कि सरकार ने उनकी लंबी मांग पर ध्यान नहीं दिया है.
हालांकि कुछ ऐसे मुद्दे भी हैं जिनपर चर्चा की गई है. लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. कई लोगों का कहना है कि सरकार को इन मुद्दों पर फैसला लेने के बजाय मूल न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी कर देनी चाहिए थी. अधिकारियों के माध्यम से सभी ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को विश्वास दिलाया था कि इस मुद्दे पर कुछ सकारात्मक खबर आएगी. हालांकि अब लग रहा है कि ये केवल आश्वासन थे ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारी किसी तरह के आंदोलन या हड़ताल पर नहीं जाएं. केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की मूल मांग थी कि मूल न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 26,000 रुपये किया जाए. सरकार ने संकेत दिया था कि इसे बढ़ाकर 21,000 रुपये किया जाएगा, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि इसपर भी कार्रवाई नहीं की गई.
Source - InKhabar
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