नई दिल्ली। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनभोगी संस्थाओं और सरकारी कर्मचारी संघों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापनों पर अब गंभीर विचार-विमर्श का दौर शुरू हो गया है। आयोग के समक्ष वेतन, भत्तों, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे गए हैं। इनमें ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाने, वेतन निर्धारण के नए फार्मूले और पेंशन संबंधी सुधारों की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। आयोग द्वारा प्राप्त इन प्रस्तावों का अध्ययन किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की सिफारिशें तैयार की जाएंगी।
कर्मचारी संगठनों के बीच सबसे अधिक चर्चा ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को ₹25 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख अथवा ₹75 लाख करने के प्रस्ताव को लेकर है। कुछ संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य व्यय और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए वर्तमान सीमा में संशोधन आवश्यक है। इसके साथ ही ग्रेच्युटी की गणना के मौजूदा फार्मूले में भी बदलाव का सुझाव दिया गया है।
इसी क्रम में NC-JCM, IRTSA और RSCWS जैसे संगठनों ने अलग-अलग सुझाव आयोग को सौंपे हैं। NC-JCM ने ₹75 लाख तक ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने सहित गणना पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। वहीं IRTSA ने ₹50 लाख की सीमा और लंबी सेवा वाले कर्मचारियों के लिए अधिक लाभ का सुझाव रखा है। RSCWS ने ग्रेच्युटी सीमा के समय-समय पर पुनरीक्षण और सेवानिवृत्ति लाभों में समानता की मांग की है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये सभी केवल कर्मचारी संगठनों द्वारा दिए गए प्रस्ताव हैं। अभी तक 8वें वेतन आयोग ने इन पर कोई अंतिम सिफारिश जारी नहीं की है और न ही केंद्र सरकार ने किसी प्रस्ताव को मंजूरी दी है। आयोग सभी पक्षों का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर आयोग की आगामी बैठकों और भविष्य की सिफारिशों पर टिकी हुई है। आने वाले महीनों में आयोग की कार्यवाही और विभिन्न मुद्दों पर उसका दृष्टिकोण 8वें वेतन आयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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