चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की मौत पर सरकार देती है केवल सवा लाख......
-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 100
समय के साथ होना चाहिए बदलाव
कर्मचारी नेता रमेश राठौर के अनुसार शासकीय कर्मचारियों से संबंधित जो प्रावधान हैं उनमें सालों तक कोई बदलाव नहीं किया जाता है। इससे विसंगति पैदा होती है। जबकि इसमें जरूरत के अनुसार लगातार बदलाव होते रहना चाहिए। बीमा की राशि वेतन से कटने के बावजूद आकस्मिक मौत होने पर उन्हें बहुत कम राशि दी जा रही है। इससे उनके परिजनों को कोई लाभ नहीं होता, जबकि शासकीय कर्मचारी पूरी जिंदगी सेवा करता है।
हर महीने कटता है 12 करोड़ बीमा अंशदान
प्रदेश के शासकीय कर्मचारी हर महीने अपने वेतन से बीमा अंशदान 12 करोड़ 18 लाख 47,900 रुपए जमा करते हैं। उसके बाद मृत्यु होने पर जो राशि दी जाती है वह बहुत ही कम है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी का कहना है कि आम आदमी जो सरकारी सेवक नहीं है बीमा का नहीं देते लेकिन किसी भी घटना में उनकी मौत हो जाती है तो उन्हें लाखों रुपए का भुगतान किया जाता है। इसलिए मुख्यमंत्री से मांग की है कि शासकीय सेवक के मरने पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 5 लाख तृतीय श्रेणी कर्मचारी को 10 लाख, द्वितीय श्रेणी अधिकारी को 15 लाख और प्रथम श्रेणी अधिकारी को 20 लाख रुपए दिए जाने चाहिए।
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