भेदभाव और शोषण (Exploitation) रोकने के लिए रणनीति बनाने के मकसद से आउटसोर्स कर्मचारियों (Outsource Workers) का राज्य स्तरीय अधिवेशन रविवार को यहां के कालीबाड़ी हॉल में हुआ। दो दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग (NHM) में तैनात आउटसोर्स कर्मियों ने स्वास्थ्य सचिव पर घरेलू काम (Domestic Work) करवाने और नौकरी से निकालने की धमकी देने के आरोप लगाए थे।
आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र लाल ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ लंबे समय से भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है। हर एक विभाग से आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। आउटसोर्स कर्मचारियों का हर एक विभाग में शोषण किया जा रहा है। इन कर्मचारियों को न तो समय पर वेतन दिया जाता है और न ही कोई छुट्टियों का प्रावधान है। आउटसोर्स कर्मचारियों से काम तो लिया जा रहा है, लेकिन नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है। कर्मचारी अपनी आवाज उठाता है तो उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। इसके खिलाफ किस तरह से आवाज बुलंद करनी है, अधिवेशन में इसकी रुपरेखा तैयार की जाएगी।
35 हजार आउटसोर्स कर्मचारी
हिमाचल सरकार के विभिन्न विभागों में 35 हजार आउटसोर्स कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन्हें सरकार ने निजी कंपनियों के माध्यम से काम पर लगाया है। इन कर्मचारियों को नियमित करने की कोई स्थायी नीति सरकार के पास नहीं है। हर साल लिखित अनुबंध के माध्यम से कर्मचारियों की सेवावृद्धि की जाती है। आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ सरकार से पहले ही यह मांग कर चुका है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सीधी भर्ती की जाए और कर्मचारियों के आजीविका की सुरक्षा को लेकर एक स्थायी नीति बनाई जाए।
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